मै हूँ तितली रंग बिरंगी

on शुक्रवार, 29 मई 2009

फूलों के संग मेरा जीना
रस उनका मुझको पीना
मै हूँ तितली रंग बिरंगी
नीली - पीली और
सतरंगी

उड़ते - उड़ते आती हूँ
बागों में मै जाती हूँ
रंग बिरंगे फूलों संग
उनके रंग चुराती हूँ

तुम भी आओ मेरे संग में
रंग भी जाओ मेरे रंग में
मै रंगों की रानी हूँ
प्यारे फूलों की नानी हूँ

काश की तुम तितली होते
हर-पल हर-दम संग रहते
हम तुम दोनों संग उड़ते
फूलों के संग हम जीते
दूर देश हर-दम जाते
पंख पे बादल हम लाते
काश की तुम तितली होते
हर-पल हर-दम संग रहते...


बारिश खत्म हो गई थी ... कुछ बूंदे पेड़ों के पत्तों से फिसल कर जमीं पर गिर रही थी... मै बगीचे में टहल रहा था... बारिस में भींगे फूलों पर तितलियाँ इठला रही थी... और उनके बीच था.... मै और मेरा कैमरा ......




4 टिप्पणियाँ:

alka sarwat ने कहा…

आपमें अच्छी फोटोग्राफी के गुण हैं और मेहनत कीजिये ,आप जरूर देश का नाम ऊंचा करेंगे

श्याम सखा 'श्याम' ने कहा…

रंग बिखेरते रहें
श्याम

shama ने कहा…

मेरे पास अल्फाज़ नही ...नाविकों और नौकाओं की तस्वीरें देखीं ...ये रचना पढी ...और बिच्छू के चित्र देखे ...इतनी सजीवता है , तस्वीरें और लखन दोनोमे ..

नाविकों के बारेमे पढ़ते ,पढ़ते ,आखोँ के आगे एक धुंद -सी छा गयी ..कहाँ आ गए हम ?

शायद आपको मेरा एक ब्लॉग देखना अच्छा लगे:

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Suman ने कहा…

good

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